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शनिवार, 20 नवंबर 2010

पुस्तक परिचय : न्यारे गीत हमारे

पुस्तक परिचय : न्यारे गीत हमारे 

संपादक : डा. नागेश पांडेय संजय 
प्रकाशक : बाल साहित्य प्रसार संस्थान ,  शाहजहांपुर 
मूल्य : ११ रुपया , संस्करण : १९९८ 



       इस संकलन में शाहजहांपुर के २६ रचनाकारों की बाल कवितायें संकलित हैं . किसी जनपद के इतने सारे कवियों  की बाल कविताओं का ये पहला संकलन है . 
        संकलन में विविध विषयों पर संकलित  रोचक कवितायेँ हैं -  लाओ मेरा ब्रश मम्मी (अजय गुप्त ), पता नहीं ( अरविन्द कुमार ) ,  पढना बंद (अरविन्द पाण्डेय भैया)  , ओस की बूंदे ( अरविन्द बेलेवार)  , संभल कर चलना ( डा. आकुल ) , मम्मी पापा बोलो ना ( कुमार गुलशन)  , गुडिया रानी ( कुलदीप दीपक ) , गधेराम जी भाग्य विधाता (कृष्णकुमार मिश्र अचूक)  , एक रहेंगे (कौशलेन्द्र मिश्र  कौशल)  , जंगल में चुनाव ( दिनेश रस्तोगी ) , अपने देश को स्वर्ग बनाना( देशबंधु शाहजहांपुरी ) , तबतक तबतक (नागेश पांडेय संजय)  , एकता सम्मलेन( पंकज मिश्र  अटल ) , बिजली रानी ( राजकुमार शर्मा)  , दादी की घंटी ( राजेंद्र प्रसाद अनीश)  , सब पर बलिहार ( रामकुमार मिश्र मधुकर) , चावल का गीत  ( रावेन्द्र कुमार रवि)  ,सारी दुनिया घर अपना ( राशिद हुसैन खान ) , आई खांसी भागे झाँसी ( विकासकुमार मिश्र )  , कभी न डरने वाले ( विश्वनाथ त्रिपाठी व्यग्र)  , मै हूँ नदिया ( शशांक मिश्र भारती )  , दीपक ( सत्येन्द्र कनौजिया राही)  , प्यारी अनु (सतीश मिश्र)  , कहानी चिड़िया की (सुनैना पांडेय अवस्थी)  , पिचक गए झगडू ( होरीलाल शर्मा नीरव ) , महक रहेगी बरसों (ज्ञानेंद्र मोहन ज्ञान ) .
         इस पुस्तक पर उस समय पत्र पत्रिकाओं में धुआं धार  छपने वाले  देवेन्द्र शर्मा डनलप ने काव्यात्मक समीक्षा लिखी थी --

  समीक्षात्मक विता : न्यारे गीत हमारे

ले आये छब्बीस बड़े ही न्यारे गीत हमारे, 
सब बच्चों के प्रिय संपादक श्री नागेश पधारे . 
अति उत्तम संकलन विविध कवि , कविता पढ़ हर्षाएं ,
 पशु, पक्षी, विज्ञान , ज्ञान , उद्यान पुष्प फल पायें .
 लाओ मेरा ब्रश मम्मी कवि  अजय गुप्त सिखलाते ,
गई रजाई  पता नहीं  अरविन्द कुमार अलसाते . 
 पढना बंद गधे का क्यों अरविन्द पाण्डेय भैया  ,
अरविन्द बेलेवार ओस की बूंदे शहद मिठैया . 
 खूब  संभल कर चलना डाक्टर आकुल गाते श्रम की , 
 मम्मी पापा बोलो ना मानो कुमार गुलशन की . 
  कुलदीप दीपक गुडिया रानी खा पी लो न रूठो , 
 गधेराम जी भाग्य विधाता कृष्णकुमार न चुको . 
 एक रहेंगे  हिन्दू मुस्लिम कौशलेन्द्र संग गाएँ , 
 जंगल में चुनाव का दुर्गुण मत  दिनेश फैलाएं . 
 अपने देश को स्वर्ग बनाना देशबंधु के गांधी , 
 तबतक तबतक बच्चे हैं नागेश-मेल के आंधी . 
वन में  पंकज अटल एकता सम्मलेन  दिखलाते ,
 बिजली रानी मैका भूलो  राजकुमार मनाते. 
दादी की घंटी प्यारी  राजेंद्र  अनीश सुनाएँ , 
हों  सब पर बलिहार के द्वारा  मधुकर शिशु बहलायें . 
रवि चावल का गीत में खिचड़ी औ पुलाव महकाते , 
 सारी दुनिया घर अपना  राशिद हुसैन खां गाते . 
 आई खांसी भागे झाँसी मिश्र  विकासकुमार ,
 विश्वनाथ त्रिपाठी जी  व्यग्र कभी न डरने वाले यार .
मै हूँ नदिया बहूँ निरंतर मिश्र शशांक का चित्रण , 
राही के  दीपक में चिमनी , कुप्पी , दिया विलक्षण . 
प्यारी अनु डरे सतीश की जब कोई चूहा फांदे , 
क्या खूब  कहानी चिड़िया की ले आई सुनैना पांडे .
 पिचक गए झगडू गुब्बारे फुस ये  होरीलाल ,
 महक रहेगी बरसों ज्ञानेंद्र  ज्ञान का खूब कमाल .
फूले, फले प्रकाशक बालसाहित्य प्रसार संस्थान , 
बजरिया ,खुटार शाहजहांपुर*** अति उत्तम स्थान . 
मनोकामना डनलप की नागेश पांडे संजय , 
बाल -जगत में प्रखर सूर्य सम चमकें बनें रणंजय . 
कितने न्यारे गीत हमारे पुस्तक पढ़े , पढ़ायें , 
राष्ट्र धरोहर प्यारे बच्चे कीर्ति ध्वजा  लहराएँ . 
देवेन्द्र शर्मा डनलप 
रुदौली , फैजाबाद 

*** प्रकाशक का तत्कालीन पता     

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