हमारे सम्मान्य समर्थक... हम जिनके आभारी हैं .

मंगलवार, 23 नवंबर 2010

मैंने देखा चिड़ियाघर

सुनो दोस्तों पापा के संग मैंने देखा चिड़ियाघर


धम्मक धम्मक हाथी देखा , देखा घोडा सरपट . 
देखा अजगर खूब बड़ा सा , बदल रहा था करवट . 
आगे शेर बबर देखा तो कांप उठे सब थर थर थर .
सुनो ...
देखा एक जिराफ मजे से हरी पत्तियां खाता .
मगरमच्छ था पड़ा हुआ नकली आंसू ढुलकाता . 
घोड़े जैसा लगा जेब्रा खूब धारिया थी उस पर . 
सुनो.. 
हिरन कुलाचे भरते देखा और मोर उड़ता था .
 भारी भरकम गेंडा  देखा इधर उधर मुड़ता था .
कंगारू के क्या कहने जी भारी देह जरा सा सर .
 सुनो.. 
रंग बिरंगी चिड़ियाँ देखी , देखे हरियल तोते .
 उछल रहे खरगोश मछलिया लगा रही थी गोते . 
देख तेंदुए  को घबडाए घूर रहा था वो कसकर . 
सुनो .. 
बाघ, भेड़िया और लोमड़ी देख देख हर्षाये , 
पर देखा जब हुक्कू बन्दर फूले  नहीं समाये  . 
मजा आ गया उसके संग में हुक्कू हुक्कू दोहराकर .
 सुनो ...

3 टिप्‍पणियां:

Love Kush ने कहा…

सैर अच्छी लगी

sameer ने कहा…

kavita ke kya kahne. Badhai

बेनामी ने कहा…

Nice.