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सोमवार, 7 नवंबर 2011

बहन हमारी

शिशुगीत : डा. नागेश पांडेय ' संजय ' 

छोटी सी है बहन हमारी ,
करती हरदम शैतानी . 
कभी नाचती , कभी कूदती , 
कभी खेलती है पानी .

कभी पकड़ कर बाल नोचती , 
कभी फाड़ देती पुस्तक . 
डाटो तो सो जाती है पर , 
उठकर करती है बक-बक .

3 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत उम्दा!
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आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है! सूचनार्थ!

बेनामी ने कहा…

chhoti bachhi ki gatividhiyon ko kendra men rakh kar aapne atyant suruchipoorn kavita rachi hai. mujhe laga jaise apne meri bhanji namami ka varnan kar diya. main aapki kavita kahani pahle bhi padhti rahi hoo sir, aap bahut sundar likhte hai.
kalpana pandey

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

सुन्दर रचना।
मेरे अपने अनुभव की बातें।