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शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

नई पुस्तक - अपलम चपलम

पुस्तक - अपलम चपलम ,
कवि : डा, नागेश पांडेय संजय 
 प्रकाशक - श्री गाँधी पुस्तकालय , चौक , शाहजहांपुर , 
मूल्य - पांच रुपया मात्र , 
संस्करण - प्रथम , २०१० ,

 इस पुस्तक में १३ सचित्र शिशुगीत हैं .
 सुन्दर चित्र ममता रंजन ने बनाये हैं .
 आवरण सजाया है अरविन्द राज ने . 

इस पुस्तक के परिचय के रूप में पढ़ें
 प्रसिद्द हास्य कवि दिनेश रस्तोगी की

 काव्यात्मक समीक्षा 

मुह में चुबला करके चुइंगम ,
 पढ़ी खूब फिर अपलम चपलम . 
सोलह  प्रष्टों की यह पुस्तक . 
कवितायें हैं पर तेरह तक . 
पहली कविता में काफी दम ,
 हाँ हाँ वो ही अपलम चपलम . 
दूजी कविता बस वाली है ,
 सीट नहीं कोई खाली है . 
तीसरी  कविता में गौरैया , 
नहीं असल में दिखती भैया . 
चौथी तो है बहन हमारी ,
 छोटी नटखट न्यारी , प्यारी . 
पांचवी कविता मोटर कार , 
सरपट दौड़ेगी सरकार . 
गुच्छे में दिखता लंगूर , 
छटी हुई कविता अंगूर . 
दादी का चश्मा क्या बात , 
कविता वह है नंबर सात . 
जब आएगी होली भैया , 
रंग खेलो या कोको तैया . 
नाइन बिल्ली निकली लाट ,
 खूब बचाया बन्दर बाँट . 
दसवीं कविता दस में दस ,
 सोओ  और सोने दो बस . 
जय कंप्यूटर भैया घर में ,
द्रष्टि क्षीण  हो पहनो चश्में .
लाड  प्यार में बिगड़ा लाल, 
दूध नहीं दुद्धू का कमाल .
श्रेष्ठ कवि , सुन्दर है शुचिता , 
पर है अंतिम गड़बड़ कविता . 
                 -दिनेश रस्तोगी  
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इस पुस्तक की समीक्षा English में पढने के लिए  यहाँ क्लिक करें .

3 टिप्‍पणियां:

Kailash C Sharma ने कहा…

बधाई!

बेनामी ने कहा…

good

अंकुर ने कहा…

good