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शनिवार, 27 नवंबर 2010

कापी नहीं खोई

नन्ही सी सौम्या . पढ़ती थी कक्षा एक में . अक्सर जब स्कूल से  लौटती  तो कहती - मम्मी .. मम्मी मेरी कापी खो गयी . कोइ उस पर हँसता तो कोइ उसे चिढ़ाता . पर बेचारी करे क्या ..? 
 तो एक दिन तो उसके पापा को गुस्सा आ ही गया . वे बोले - " देख सौम्या , अगर फिर तूने कापी खोई तो मैं तुझे पंखे में उल्टा लटका दूँगा ." 
 बेचारी सौम्या , वह तो डर के मारे मम्मी की गोद में जा दुबकी . 
तो सुनो आगे की बात , कुछ दिन के बाद जब एक दिन सौम्या स्कूल से लौटी तो बहुत खुश होकर बोली - "पापा , पापा  . हमें पंखे में मत लटकाना . ... मैंने कापी नहीं खोई . " 
पापा ने चहक कर उसे अपनी गोद में उठा लिया . अरे वाह . ...रानी बिटिया हो गयी सौम्या . 
सौम्या धीरे से बोली-" पापा इस बार मैंने किताब खोई है. "

2 टिप्‍पणियां:

अभिषेक शर्मा ने कहा…

सुन्दर एवं रोचक कहानी . फोटो में शैतानी झलकती है . अच्छा है .

बलराम अवस्थी ने कहा…

कहानी में भोलापन है और नटखट पन भी .बधाई .