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रविवार, 26 दिसंबर 2010

इम्तहान की बिल्ली आई

बाल गीत : डा. नागेश पांडेय ' संजय ' 

इम्तहान की बिल्ली आई,
बड़े जोर से वह गुर्राई।
सारे चूहे काँपे थर-थर,
झट भागे सिर पर पग रखकर।
पहुँचे जिसके तिसके बिल में,
धुकुर-पुकुर थी सबके दिल में।
छूट रही थी तेज रुलाई
इम्तहान की बिल्ली आई।

चहकी इम्तहान की बिल्ली,
लगी उड़ाने सबकी खिल्ली-
है कोई जो बाहर आए,
आकर मुझसे आँख मिलाए,
याद दिला दूँगी रघुराई,
इम्तहान की बिल्ली आई।

सुन बिल्ली की बातें तीखी,
नेहा बाहर आकर चीखी-
‘भाग! अरी, ओ बिल्ली कानी,
वरना याद दिला दूँ नानी।
बिल्ली की मति थी चकराई,
इम्तहान की बिल्ली आई।

काँपी इम्तहान की बिल्ली,
गई आगरा होकर दिल्ली।
नेहा का था मान बढ़ा अब,
था उसका सम्मान बढ़ा अब।
वह सौ में सौ नम्बर लाई
हुई हर जगह खूब बड़ाई।

6 टिप्‍पणियां:

मंजुला ने कहा…

wow nice ...pahli kavita bachho ke liye padh rahi hoon yahan ...thanks ...

मंजुला ने कहा…

aapne follower ki list jo end may rakhi hai usay upar kariye kisi ko bhi follow karne may aasani hogi...

subhkamnaye
manjula..

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

बहुत बढ़िया बालगीत!

sheelu ने कहा…

इम्तहान पर पहली बार ऐसी प्रतीकात्मक कविता पढ़ी , आपका लेखन लाजबाब है . बधाई .

डॉ. नागेश पांडेय संजय ने कहा…

आप सभी की उत्साहवर्धक टिप्पणियों के लिए आभार

डॉ. नागेश पांडेय संजय ने कहा…

आप सभी की उत्साहवर्धक टिप्पणियों के लिए आभार