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शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010

नया वर्ष फिर आया है



अडिग लगन उत्साह अगर है , 
मन में सच्ची चाह अगर है .
तो सपने होंगे साकार , 
खुशियाँ खुद आएँगी द्वार . 
यह संदेसा लाया है . 
नया वर्ष फिर आया है .

बाधा के आगे झुक जाते , 
प्रगति - राह में वे रुक जाते . 
चलना जिसकी आन शान है , 
उसे विजय का मिला मान है . 
उसके यश का गान समय ने , 
युगों - युगों तक गाया है .
नया वर्ष फिर आया है .

जो आँधी में दीप जलाते ,
काँटो में रहकर मुस्काते . 
कभी निराश नहीं होते जो . 
कभी उदास  नहीं होते जो .
परहित  कष्ट उठाया है , 
वे ही आगे बढे शान से , 
मनचाहा सब पाया है . 
नया वर्ष फिर आया है .

3 टिप्‍पणियां:

एस.एम.मासूम ने कहा…

नववर्ष आपके लिए मंगलमय हो और आपके जीवन में सुख सम्रद्धि आये…एस.एम् .मासूम

मंजुला ने कहा…

नए वर्ष पर बहुत प्यारी रचना....

नव वर्ष की बहुत शुभकामनाये......

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

सुन्दर भावों से ओत प्रोत बेहतरीन रचना !
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ