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बुधवार, 19 जनवरी 2011

बोल चिरौटे,चूँ-चूँ-चूँ

 बोल चिरौटे,चूँ-चूँ-चूँ

 बालगीत : डा. नागेश पांडेय 'संजय'
चित्र सौजन्य : अरविंद राज 


चूँ-चूँ, चूँ-चूँ बोल चिरौटे,
चूँ-चूँ, चूँ-चूँ बोल!

देख चिडै़या लाई दाना,
कुटुर-कुटुर कर अब तू खाना।
लेकिन मुँह तो खोल चिरौटे,
लेकिन मुँह तो खोल!

बड़े हो रहे पंख तुम्हारे,
उड़ने की कोशिश कर प्यारे!
आसमान में डोल चिरौटे,
आसमान में डोल!

चिड़िया ने है दही जमाया,
उसे भगौने में रखवाया।
जल्दी ढक्कन खोल चिरौटे,
जल्दी ढक्कन खोल!

चूँ-चूँ, चूँ-चूँ बोल चिरौटे,
चूँ-चूँ, चूँ-चूँ बोल!





2 टिप्‍पणियां:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

प्यारी और सुंदर कविता.....

Mithilesh dubey ने कहा…

सुंदर कविता