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शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011

पढ़ने के दिन

बालगीत :  डा. नागेश पांडेय ' संजय ' 

कापी और किताब निकालो,
पढ़ा-लिखा फिर से दोहरा लो,
नहीं चूक अब करो तनिक-
ये पढ़ने के दिन हैं।

नई-नई कक्षा में भइया
बढ़ने के दिन हैं।

खूब लगन से पढ़कर  ही तो,
अच्छे नम्बर पाओगे,
अच्छे नम्बर पाकर ही तो
अच्छे छात्र कहाओगे।

अपनी किस्मत को भइया
खुद गढ़ने के दिन हैं।

नहीं चूक अब करो तनिक
ये पढ़ने के दिन हैं।

नींद कहेगी सोओ, तुमसे
खेल कहेगा, खेलो,
और कहेगा मन टाइम है ,
तब तक घूमो टहलो।

इन सारी बाधाओं से ही
लड़ने के दिन हैं।

नहीं चूक अब करो तनिक
ये पढ़ने के दिन हैं।

चित्र : गूगल सर्च से साभार 

5 टिप्‍पणियां:

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर...

http://bachhonkakona.blogspot.com/

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

सुंदर रचना ...

चैतन्य शर्मा ने कहा…

अच्छी लगी पढ्ने की कविता

अनुष्का 'ईवा' ने कहा…

बहुत अच्छी शिक्षा देती सुन्दर कविता के लिए धन्यवाद !

Dr. Rastra ने कहा…

प्रेरक बाल गीत .