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मंगलवार, 26 अप्रैल 2011

यदि ऐसा हो जाए




बाल कविता : डा. नागेश पांडेय 'संजय '

कितना अच्छा  हो यदि ,
अंबर रसगुल्ले बरसाए .
और हवा संग टाफी उड़कर
पास हमारे आए .
बहे  नदी में दूध , पेड़ में
लगें किताबें प्यारी  .
धरती उगले चाकलेट नित
भारी - भरकम न्यारी .
विद्यालय में टीचर बांटे ,
मेवा और मिठाई .
जब जी चाहे , तब हम कर लें
थोड़ी - बहुत पढाई .
इम्तहान को दिए बिना ही
अगली कक्षा जाएँ .
बिना कुछ किए सारे जग में
ऊँचा नाम कमाए .
यदि ऐसा हो जाए , तो सच
मजा बहुत  आएगा .
लेकिन क्या बिन मेहनत के फल
दिल को भी भाएगा ?
हम अच्छे बच्चे , हमको ये
सपने नहीं सुहाते .
इन बेढंगी बातों पर हम
कभी नहीं इतराते .
लेखक की प्रकाशनाधीन पुस्तक से साभार 
 

7 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

इम्तहान को दिए बिना ही
अगली कक्षा जाएँ .
बिना कुछ किए सारे जग में
ऊँचा नाम कमाए .
--
वाह!
बहुत सुन्दर!
यह तो बच्चों के मन की बात हो गई!

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

कितना अच्छा हो यदि ,
अंबर रसगुल्ले बरसाए .
और हवा संग टाफी उड़कर
पास हमारे आए .

बहुत सुंदर..सच में बचपन की बात ही अनोखी है....

Kailash C Sharma ने कहा…

यदि ऐसा हो जाए , तो सच
मजा बहुत आएगा .
लेकिन क्या बिन मेहनत के फल
दिल को भी भाएगा ?

...बहुत प्रेरक और रोचक बाल गीत..आभार

चैतन्य शर्मा ने कहा…

सुंदर ...प्यारी कविता

Akshita (Pakhi) ने कहा…

वाह, तब तो बहुत मजा आयेगा...हुर्रे.


____________________________
'पाखी की दुनिया' में तन्वी आज 6 माह की.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता!
सृष्टि को जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

बलराम ने कहा…

रोचक और बेहद ही मजेदार गीत