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रविवार, 12 जून 2011

अहा ! मजा आया!

बालगीत : नागेश पांडेय 'संजय'
चुन्नू को खाने को मक्खन मिला,
अहा ! मजा आया!

गप्प-गप्प खाया जी,
हप्प-हप्प खाया जी,
खत्म हुआ फिर तो झट
मक्खन लगाया जी
अच्छा है मक्खन ये और तो दिला।
                                           अहा ! मजा आया!


विम्मी ने लिया नहीं,
सिम्मी को दिया नहीं
मक्खन के चक्कर में
होमवर्क किया नहीं।
टीचर-कनबुच्ची से दिल फिर हिला।
                                           अहा ! मजा आया!


मनाई दुहाई जी,
बात समझ आई जी
मक्खन है अच्छा पर
पहले पढ़ाई जी।
चुन्नू को किसी से न कोई गिला।
                                             अहा! मजा आया!

4 टिप्‍पणियां:

डॉ. नागेश पांडेय "संजय" ने कहा…

मेरा यह बाल गीत '' 151 बाल कविताएँ ''(संपादक - जाकिर अली रजनीश ) में भी संकलित है..

Kashvi Kaneri ने कहा…

बहुत ही प्यारी कविता

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

यब रचना पढ़कर हमें भी बहुत मज़ा आया!

सदा ने कहा…

वाह ... बहुत ही सुन्‍दर ।