डा. नागेश पांडेय 'संजय' का साहित्य संसार
मुक्तक : डॉ. नागेश पांडेय 'संजय'
नेह घट हैं पिता, एक वट है पिता;
आत्मज के सदा ही निकट है पिता।
मन भँवर में कभी भी फँसा तो लगा,
भाव है, नाव हैं, एक तट है पिता।